मेरठ। पश्चिम के दो छोरे, एक को जीतना था और दूसरे को हारना। ऐसा हुआ भी लेकिन हारने वाला कोई और नहीं था, वह था राजा। सवाल यह भी है कि आखिर राजा चौधरी ही क्यों, क्या मेरठ ने वैसा सब कुछ नहीं किया जो सहारनपुर ने कर दिखाया। या फिर राजा ही मेरठ का वह प्यार नहीं पा सका जो सहारनपुर ने आशू की झोली में बरसा दिया। राजा के ममेरे भाई मनीष ने बताया कि राजा के समर्थकों ने मुंबई में हंगामा कर दिया है, हालात नियंत्रित करने के लिये चैनल को पुलिस फोर्स मंगा लेनी पड़ी है। लेकिन इन सबके बीच,अपना राजा भले ही लोगों के दिल के राजा बन गया लेकिन बिग बास का राजा नहीं बन पाया।
लोगों के दिल का राजा इसलिये भी कि राहुल महाजन के बाहर होने के बाद चारों तरफ से एक ही आवाज आ रही थी कि राजा.राजा और सिर्फ राजा। लेकिन यहां खेल एसएमएस का है, यहां दिल नहीं एसएमएस चलता है। वह धड़कता है और वहीं वह रास्ता तय करता है जो सीधा बिग बास का राजा बनाता है। कोई शक नहीं कि राजा मेरठ का छोरा है, यहां वह जन्मा और पढ़ा लिखा और मुंबई के लिये रवाना हो गया। उसकी पत्नी श्वेता तिवारी ‘कसौटी जिंदगी की’ के जरिये मशहूर कलाकार की फेहरिस्त में शामिल हो गयी जबकि राजा चौधरी को यह मुकाम पाने के लिये खासी मशक्कत करनी पड़ी। कई बार राजा का नाम चर्चा में आया लेकिन अन्य कारणों से, अब जबकि बिग बास के घर में तीन माह रहने के लिये उसका चयन हुआ तो वह तेजी से लोगों के दिल में जगह बना गया। हां, सहारनपुर के आशू व मेरठ के राजा में मूलभूत कई अंतर इस नतीजे के बाद देखने में आये। एक यह भी कि सहारनपुर जैसे प्रयास मेरठ में नहीं हो पाये। सहारनपुर को आशू के चाहने वालों ने पोस्टर व बैनर से पाट दिया था जबकि मेरठ में राजा का एक पोस्टर अथवा बैनर भी नहीं लगा। कुछ ऐसे प्रयास भी नहीं हुए जिससे मेरठ राजा के पीछे खड़ा नजर आता। हालांकि पिछले पांच बार से यही बात सामने आ रही थी कि मेरठ की बदौलत ही राजा बाहर होते-होते बचा था लेकिन हकीकत क्या है यह तो संचालक ही जानें?
